भारत रत्न 2024 के लिए इन पांच प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है

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भारत रत्न

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न के लिए चुन गए 5 सम्मनित व्यक्तियों के नाम की घोषणा की गयी है इस वर्ष पहली बार 5 उत्कृष्ट लोगो को ये सर्वोच्च सम्मान दिया जा रहा है।

भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा जैसे कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल के लिए दिया जाता है. अपने क्षेत्र में अहम कार्य और योगदान से देश का गौरव बढ़ाने वाले लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है।

  • भारत रत्न देने की शुरुआत 2 जनवरी,1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने की थी।
  • जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना कोई भी व्यक्ति इस सम्मान के लिए पात्र है।
  • यह मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र में उच्चतम स्तर की असाधारण सेवा/प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है।
  • भारत रत्न के लिए सिफारिशें स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति को किया जाता है। इसके लिए किसी औपचारिक recommendation की आवश्यकता नहीं होती है।
  • पुरस्कार प्रदान किए जाने पर, प्राप्तकर्ता को राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एक certificate और एक पदक प्राप्त होता है। पुरस्कार में कोई मौद्रिक अनुदान नहीं होताहै।

लालकृष्ण आडवाणी: भाजपा के दिग्गज नेता जो राम मंदिर आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण थे।

कर्पूरी ठाकुर :बिहार के प्रगतिशील नेता

पीवी नरसिम्हा राव :आर्थिक सुधारों के वास्तुकार

चौधरी चरण सिंह :कृषि नीतियों के समर्थक

एमएस स्वामीनाथन: हरित क्रांति के संस्थापक

लालकृष्ण आडवाणी

भारतीय राजनीतिज्ञ जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संस्थापक सदस्य और भारत के उप प्रधान मंत्री (2002-04) थे। वह भाजपा को लोकप्रिय बनाने और मजबूत करने के लिए काफी हद तक जिम्मेदार थे, जो 1980 में अपने गठन के बाद से भारत में सबसे मजबूत राजनीतिक ताकतों में से एक बनकर उभरी। राम मंदिर आंदोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। अयोध्या में राम जन्मभूमि स्थल पर एक भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए व्यापक समर्थन जुटने के लिए 1990 में उन्होंने सम्पूर्ण भारत की रथ यात्रा की ।

कर्पूरी ठाकुर

कर्पूरी ठाकुर (24 जनवरी 1924 – 17 फरवरी 1988) एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जो दो बार बिहार के 11वें मुख्यमंत्री रहे, पहले दिसंबर 1970 से जून 1971 तक, और फिर जून 1977 से अप्रैल 1979 तक। उन्हें जन नायक के नाम से जाना जाता था। उनकी प्रगतिशील पहल और आधुनिक बिहार की राजनीति पर उल्लेखनीय प्रभाव के कारण लोग उन्हें याद करते हैं।

पीवी नरसिम्हा राव

1991 से 1996 तक, प्रधान मंत्री पीवी नरसिम्हा राव को आर्थिक उदारीकरण और सुधारों का नेतृत्व करने का श्रेय दिया जाता है जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था में क्रांति ला दी।’लाइसेंस राज’ की समाप्ति और भारतीय अर्थनीति में खुलेपन उनके प्रधानमंत्रित्व काल में ही आरम्भ हुआ।

चौधरी चरण सिंह

जिनका जन्म 1902 में उत्तर प्रदेश में हुआ था और 1979-1980 में थोड़े समय के लिए प्रधान मंत्री रहे, ने कृषि नीतियों पर काफी प्रभावडाला। चौधरी चरण सिंह भारत के किसान राजनेता एवं पाँचवें प्रधानमंत्री थे। उन्होंने यह पद 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक संभाला। चौधरी चरण सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीयता और ग्रामीण परिवेश की मर्यादा में जिया।

एम. एस. स्वामीनाथन  

भारतीय कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को विश्व खाद्य पुरस्कार दिया गया था। उन्हें हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए इस सम्मान से नवाजा गया था। वे यह पुरस्कार हासिल करने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति थे।

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