इलेक्टोरल बॉन्ड मामला :एसबीआई को सुप्रीम कोर्ट आदेशों की अवमान्ना पर चेतावनी

0
67
इलेक्टोरल

इलेक्टोरल बॉन्ड के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में वित्त से जुड़े मामलों को भारत की जनता को जानने का अधिकार है क्या और किसे मिले इसको खुलासा करना होगा।

कोर्ट में क्या हुआ?

इस पहले फरवरी में 5 जजों की बेंच ने एसबीआई को 6 मार्च तक चुनाव आयोग को चुनावी बांड से संबंधित जानकारी प्रदान करने का आदेश दिया था इसमें ये भी जानकारी मांगी गई थी कि चुनावी बांड किसने खरीदा और किसे मिला, वही जज बेंच ने चुनाव आयोग को भी आदेश दिया कि एसबीआई से मिली जानकारी को 13 मार्च तक जनता के सामने पेश किया जाए।

एसबीआई ने डिटेल सबमिट करने की तारीख 30 जून 24 तक बढ़ाने की रिक्वेस्ट की थी, जिसे जज बेंच ने ये कहकर मना कर दिया क्योंकि अप्रैल महीने में चुनाव होना है इसके पहले चुनावी बॉन्ड से संबंधित सभी जानकारी मतदाता के सामने होनी जरूरी है अगर एसबीआई की ओर से इस अनुरोध पर विचार किया जाता है तो जानकारी सार्वजनिक होने में देरी हो जाती है और मतदाता को महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित होना पड़ेगा।जज बेंच के इस फैसले का स्वागत होना चाहिए।

कोर्ट ने एसबीआई से ये भी पूछा कि आपने पिछले 26 दिनों में इस मामले को स्पष्ट करने के लिए क्या कदम उठाए हैं, ये बात आपके आवेदन में उल्लेख नहीं है, इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने एसबीआई के आवेदन को अस्वीकार कर दिया और आगे आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देश जारी कर दिये।

एसबीआई को निर्देशों का पालन करने में देरी नहीं करनी चाहिए क्योंकि एसबीआई के पास सभी दानकर्ताओं की केवाईसी सहित पूरी जानकारी उपलब्ध है, इसलिए एसबीआई को 12 मार्च को व्यावसायिक घंटे समाप्त होने से पहले चुनावी बांड से संबंधित मांगी गई जानकारी चुनाव आयोग को दे देनी चाहिए।

कल सोमवार को एसबीआई की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने बैंक का पक्ष रखा, साल्वे का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एसबीआई ने नया चुनावी बांड जारी नहीं किया है, लेकिन बांड की विस्तृत प्रक्रिया को नए सिरे से जारी करने के लिए एसबीआई को टाइम चाहिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई की दलीलें खारिज करके 12 मार्च तक सभी विवरण चुनाव आयोग को हैंडओवर करने का नया ऑर्डर पास कर दिया।

 इस पहले फरवरी में सीजेआई ने चुनावी बांड योजना को रद्द कर दिया था कि राजनीतिक दलों को होने वाली फंडिंग की जानकारी मतदाता की वोटिंग पसंद के प्रभावी प्रयोग के लिए जरूरी है और ये मतदाता का अधिकार भी है।

सीजेआई ने कहा कि एसओपी में जो गाइड लाइन दी गई है उसके अनुसार “चुनावी बांड खरीदने वाले और बांड से जुड़ी पूरी जानकारी में कोई कनेक्शन नहीं होना चाहिए’’ मुख्य न्यायाधीश ने कहा कोर्ट को बताया गया था कि इस जानकारी को गुप्त रखा जाना है, बांड ख़रीदने वाले का नाम और तारीख कोड (गुप्त) की गई है, जिसका खुलासा करने के लिए समय चाहिए।

सीजेआई ने यह भी कहा कि इस बात की वैध संभावना है कि किसी राजनीतिक दल को चंदा देना और राजनीति के बीच जो संबंध है उसका दुरुपयोग करके बदले में चंदा देने वाला चंदे का फायदा लेना चाहेगा।

सीजेआई चंद्रचूड़ ने एसबीआई से पूछा कि किस पार्टी को किस डोनर ने चंदा दिया है इसकी जानकारी सील कवर में एसबीआई हेड क्वार्टर मुंबई में है जिसकी मैचिंग के लिए आप समय मांग रहे हैं, लेकिन हमने मैचिंग के लिए आपको निर्देश नहीं दिए दिया था हमने केवल आपसे स्पष्टीकरण मांगा था।

चुनावी बॉन्ड मामले की सुनवाई संविधान पीठ कर रही है पीठ के सदस्य जस्टिस खन्ना ने एसबीआई के वकील हरीश साल्वे से कहा कि आपने चुनावी बॉन्ड को खरीदकर चंदा देने वाले डोनर और पार्टियों की पूरी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में रखी है तो आपको केवल सील ओपन करके जानकारी को सार्वजनिक करना है।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने एसबीआई को फटकार लगाते हुए कहा कि हम आपसे चीजों को स्पष्ट करने की उम्मीद करते हैं, हमने आपको 15 फरवरी को स्पष्टीकरण देने के लिए कहा था और आज 11 मार्च है, लेकिन पिछले 26 दिन में इस मामले में क्या प्रगति हुई है, इसकी जानकारी एसबीआई को कोर्ट के सामने रखनी चाहिए।

कोर्ट में एसबीआई ने अपना पक्ष रखा

एसबीआई ने कहा कि 22, 217 चुनावी बांड का उपयोग राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए किया गया है हर बांड में 2 सेट है एक डोनर और रिसीवर पार्टी, इसके अनुसार 44,434 सेट को डिकोड करना होगा इस पर कोर्ट ने कहा “एसबीआई देश का सबसे पुराना बैंक है जानकारी और निर्णय लेने के लिए एसबीआई के पास पर्याप्त स्टाफ है, एसबीआई को डिकोड करने में होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का बहाना नहीं बनाना चाहिए”।

एसबीआई के वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट से कहा कि अगर कोर्ट जानकारी को मैच नहीं करवाना चाहता है तो 3 हफ्ते में एसबीआई पूरी जानकारी मुहैया करा सकता है, इस पर कोर्ट ने एसबीआई की दलील को खारिज करते हुए 12 मार्च को पूरी जानकारी चुनाव आयोग को हैंडओवर करने का आदेश दिया और यह चुनाव आयोग को जानकारी 15 मार्च तक सार्वजनिक करने का आदेश दिया।

एसबीआई

कोर्ट ने एसबीआई को चेतावनी दी है कि कोर्ट के आदेशों को ना मानने के कारण अभी एसबीआई के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है लेकिन एसबीआई जानबूझ कर कोर्ट के आदेशों की उपेक्षा कर रही है और निर्देशित टाइम लाइन को पूरा नहीं कर रही है। जिससे भविष्य में बैंक के खिलाफ अवमान्ना नोटिस लाया जा सकता है साथ ही कोर्ट ने एसबीआई के एमडी और चेयरमैन को एफिडेविट जमा करने का आदेश दिया, जिससे कोर्ट का आदेश  दी गई टाइमलाइन में पूरा किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट में एडीआर याचिका

इस कोर्ट में एनजीओ एडीआर ने एसबीआई के खिलाफ अवमान्ना याचिका लगाई थी, इस याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई दरअसल एनजीओ एडीआई ने सुप्रीम कोर्ट में एसबीआई के जानबूझकर कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करने और देरी करने के खिलाफ अपील लगाई थी जिस पर आज कोर्ट ने संज्ञान लिया।

सुप्रीम कोर्ट जज बेंच

चुनावी बांड से जुड़े मामले में 5 जजों की पीठ सुनवाई कर रही है जिनमें सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस जेबी पारदीवाला, के अलावा जस्टिस बीआर गवई शामिल हैं इस बेंच के अध्यक्ष सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ हैं।

सुप्रीम कोर्ट का पूर्व निर्णय

चुनावी बांड योजना SC ने 15 फरवरी को रद्द करके कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी, कोर्ट ने इस योजना को संविधान के खिलाफ घोषित किया, चुनावी बांड योजना के अकेले वित्तीय निकाय के रूप में कार्य कर रहे SBI को 12 मार्च 2019 से अब तक चुनावी बांड खरीदारी की विस्तृत जानकारी 6 मार्च तक चुनाव आयोग को सौंपने का ऑर्डर दिया था।

Election Commission

सुप्रीम कोर्ट की चुनाव आयोग पर टिप्पणी

दूसरी तरफ एससी ने चुनाव आयोग को भी इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में एसबीआई पर जानकारी साझा करने के लिए दबाव न बनाने के लिए टिप्पणी की, कोर्ट का कहना था कि चुनाव आयोग को पहले ही एसबीआई से इलेक्टोरल बॉन्ड की सारी जानकारी मांग लेनी चाहिए थी क्योंकि ये केस वोटर के संवैधानिक और चुनावी मूल अधिकार से जुड़ा है।

FAQs

Q: चुनावी बांड बिक्री के लिए कौन अधिकृत है?

A: बिक्री के XIV चरण में एसबीआई को 19.10 से अपनी 26 अधिकृत शाखाओं से चुनावी बांड जारी करने और cash करने के लिए अधिकृत किया गया है।

Q: चुनावी बांड की अधिकतम सीमा क्या है?

A: चुनावी बांड एसबीआई की 29 शाखाओं से1,000,10,000,10,00,00,10,000,00,1,00,00,000 के गुणन में किसी भी मूल्य के लिए जारी/खरीदारी की जा सकती है।

आपको इलेक्टोरल बॉन्ड मामला पोस्ट में इलेक्टोरल बॉन्ड से संबंधित सभी जानकारी उपलब्ध कराई गयी है यदि आपको जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे अपने मित्र मंडली में साझा करें। और Comment करें।

इन्हें भी पढ़े:

पीएम मोदी एनटीपीसी की 30.000 करोड़ के बिजली प्रोजेक्ट शृंखला की आधारशिला रखेंगे

Pratham EPC Project IPO:11 मार्च को ओपन होगा जानें SME IPO की GMP, Listing और बहुत कुछ!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here