विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा विधि, मंत्र, शुभ मुहूर्त -बंसत पंचमी पर विशेष

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विद्या की देवी

विद्या की देवी सरस्वती से जुड़े सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक वसंत पंचमी हिंदू त्योहार है। हिंदू कैलेंडर के माघ महीने में 5 वें दिन मनाया जाता है

सरस्वती एक संस्कृत शब्द है देवी सरस्वती को ज्ञान,संगीत,बहते पानी, प्रचुरता और धन, कला, भाषण, ज्ञान और सीखने की देवी मना जाता है देवी के रूप में सरस्वती का सबसे पहला उल्लेख ऋग्वेद से मिलता है देवी सरस्वती प्राचीन काल से आज तकएक देवी के रूप में महत्वपूर्ण बनी हुई हैं उन्हें आम तौर पर चार भुजाओंके साथ चित्रित किया गया है जिनमें चार प्रतीक हैं: एक पुस्तक, एक माला, एक पानी का बर्तन और एक संगीत वाद्ययंत्र जिसे वीणा कहा जाता है

बंसत पंचमी का त्योहार (वसंत का पांचवां दिन,और भारत में इसे सरस्वती पूजा और सरस्वती जयंती के रूप में भी जाना जाता है) और इस दिन को छोटे बच्चों को विद्या पढने ,लिखना सीखने में मदद करके मनाया जाता है। सरस्वती शब्द एक नदी के संदर्भ और एक महत्वपूर्ण देवता दोनों के रूप में प्रकट होता है सरस्वती सबसे पहले एक पवित्र नदी के रूप में दिखाई देती है, जिसके किनारे तीर्थयात्राएँ की जाती हैं। उन्हें वाणी और ज्ञान की देवी के रूप में भी दर्शाया गया है

महाभारत में भी आमतौर पर उन्हें अपने आप में ज्ञान की देवी के रूप में प्रस्तुत करता है देवी सरस्वती को  शुद्ध सफेद कपड़े पहने चित्रित किया जाता है, जो सफेद कमल पर बैठी होती है,जो प्रकाश, ज्ञान और सत्य का प्रतीक है। वह न केवल ज्ञान का बल्कि उच्चतम वास्तविकता के अनुभव का भी प्रतीक है। उनकी प्रतीकात्मकता पोशाक से लेकर फूलों से लेकर हंस तक सफेद विषयों में है – यह रंग सत्व गुण या पवित्रता, सच्चे ज्ञान, अंतर्दृष्टि और ज्ञान का प्रतीक है। उनके ध्यान मंत्र में उन्हें चंद्रमा के समान श्वेत, श्वेत पोशाक पहने, श्वेत आभूषणों से सुसज्जित, सुंदरता से दमकती हुई, हाथों में एक किताब और एक कलम पकड़े हुए बताया गया है।

बंसत पंचमी मुहूर्त :पंचमी तिथि 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर प्रारंभ होगी और 14 फरवरी 2024 को दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार बसंती का पर्व 14 फरवरी को ही मनाया जाएगा. इस दिन लाभ व अमृत मुहूर्तः सुबह 7 से 9 बजे तक रहेगा.

14 फरवरी को ही मनाया जाएगा. इस दिन लाभ व अमृत मुहूर्तः सुबह 7 से 9 बजे तक रहेगा.

इस साल बसंत पंचमी की शुरुआत रवि योग से होने जा रही है. इस साल बसंत पंचमी पर एक नहीं तीन शुभ बनने जा रहे हैं इस दिन

रवि योग सुबह 10 बजकर 43 मिनट से लेकर 15 फरवरी को सुबह 7 बजे तक रहेगा

रेवती नक्षत्र- इस बार बसंत पंचमी रेवती नक्षत्र में मनाई जाएगी जो कि बहुत खास माना जा रहा है.

रेवती नक्षत्र- 13 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से से शुरू होगा और समापन 14 फरवरी को सुबह 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.

अश्विनी नक्षत्र- इस दिन अश्विनी नक्षत्र सुबह 10 बजकर 43 मिनट से शुरू होगा और समापन 15 फरवरी को सुबह 9 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा.

देवी सरस्वती मंत्र-

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

अर्थ : जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली मां सरस्वती हमारी रक्षा करें।

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी।

विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा॥

अर्थ : हे सबकी कामना पूर्ण करने वाली माता सरस्वती, आपको नमस्कार करता हूँ।मैं अपनी विद्या ग्रहण करना आरम्भ कर रहा हूँ , मुझे इस कार्य में सिद्धि मिले।

पूजा विधि: बसंत पंचमी के दिन सुबह सबसे पहले धरती माँ को स्पर्श कर नमन करें। मां सरस्वती को बागीश्वरी, से भी पूजा जाता है स्नानादि के बाद पीले रंग के कपड़े पहने, पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. मां सरस्वती की प्रतिमा को गंगा जल से साफ करके पीले या सफेद रंग के ही कपड़े पहनाएं. मां सरस्वती की मूर्ति पर चंदन का तिलक, हल्दी, फल, पुष्प, रोली, केसर और चावल अर्पित करें. पूजा के स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबों को रखें इस दिन से बसंत का आगमन हो जाता है इसलिए देवी को गुलाब अर्पित करना चाहिए. गुलाल से एक-दूसरे को टीका लगाना चाहिए

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