वैलेंटाइन डे को मातृ पितृ पूजन दिवस के रूप में कैसे मनाये ?/How to celebrate Velentine Day as Matra Pitra Pujan Diwas?

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वैलेंटाइन डे

वैलेंटाइन डे के दिन सभी धर्मों के बच्चे अपने माता-पिता की पूजा करते हैं और उन्हें तिलक, माला चढ़ाकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। कई लोग इसे परिवार के सदस्यों के बीच बंधन को मजबूत करने और बच्चों में सम्मान,आज्ञाकारिता और विनम्रता जैसे अच्छे मूल्यों को विकसित करने की एक विधि के रूप में देखते हैं।

वेलेंटाइन डे को माता-पिता पूजा दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है?

अपने जीवन में इस मुकाम तक पहुंचने के लिए आपके माता-पिता ने कड़ी मेहनत की है। माता-पिता और बच्चे का प्रेम संबंध सबसे महान और पवित्र होता है। सच्चे प्यार और वैलेंटाइन डे को उसकी निःस्वार्थ महिमा का सम्मान करने के लिए वैलेंटाइन डे पर माता-पिता पूजा दिवस मनाया जाता है। माता-पिता पूजन दिवस बच्चों के दिल और आत्मा को अपने माता-पिता की सार्थक तरीके से सेवा करने के लिए प्रेरित करता है। यह उत्सव उस पूजा से प्रेरित है जो छोटे गणपति भगवान शिव और मां पार्वती के लिए करते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन बाल रूप में भगवान गणेश और उनके भाई कार्तिक का इस बात पर झगड़ा हो गया कि दोनों में से सबसे शक्तिशाली कौन है. दोनों का झगड़ा इतना बढ़ गया कि ये लड़ते-लड़ते अपने माता-पिता के पास पहुंच गए. दोनों ने नादानी में भगवान शिव और माता पार्वती से ही पूछ लिया कि हमें बताएं कि हम दोनों में से शक्तिशाली कौन है. पहले तो माता-पिता ने इन्हें बहलाने की कोशिश की लेकिन बार-बार बच्चों की जिद्द करने पर शिवजी और पावर्ती जी ने बच्चों से कहा कि दोनों अपने वाहनों पर सवार होकर पृथ्वी के तीन चक्कर काटकर आओ. जो भी पहले आएगा वो ही शक्तिशाली कहलाएगा.

कार्तिक भगवान ने जल्द से अपना वाहन मोर निकाला और पृथ्वी के चक्कर काटने निकल पड़े. अब गणेश जी का वाहन तो चूहा था.आश्चर्यचकित होकर कार्तिक ने देखा कि वो जहां से जा रहे हैं भगवान गणेश की सवारी चूहे के निशान पहले से ही वहां मौजूद हैं. लेकिन हैरान करने वाली बात ये थी कि उन्हें रास्ते में कहीं भी गणेश जी नहीं दिखे.

परिक्रमा पूरी करके वो वापस अपने माता पिता के पास लौटे तब उन्होंने देखा की गणेश जी तो पहले से ही यहां मौजूद हैं और खेल रहे रहें. बुद्धिदाता गणेश जी पृथ्वी का चक्कर लगाने गए ही नहीं उन्होंने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर ली. गणेश जी ने कहा कि माता-पिता की परिक्रमा करना त्रिलोक परिक्रमा के समान होती है

इसका उद्देश्य भारतीय बच्चों में उन सांस्कृतिक मूल्यों का महत्व स्थापित करना है जो हमारे भारतीय वंश से आते हैं। माता-पिता पूजा दिवस का मुख्य लक्ष्य पारिवारिक संबंधों को गहरा करना और अपने माता-पिता द्वारा हमारे लिए किए गए हर काम के लिए उनका आभार व्यक्त करना, निस्वार्थ भाव से सच्चे, शुद्ध प्रेम का उदाहरण स्थापित करना है।

मातृ पितृ पूजन दिवस: इसे कैसे मनाया जाए?

  • अपने माता-पिता को आरामदायक कुर्सी पर बिठाएं।
  • उनके माथे पर तिलक लगाएं और उन्हें फूल भेंट करें।
  • अपने माता-पिता को विनम्र और प्रेमपूर्ण अभिवादन दें।
  • अपने माता-पिता की लंबी और अच्छी उम्र के लिए प्रार्थना करें और उनकी पूजा करें।और उन्हें माता-पिता पूजन दिवस की शुभकामनाएं दें।
  • लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार, छत्तीसगढ़ में हर साल 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे के बजाय माता-पिता पूजा दिवस के रूप में मनाया जाता है।बच्चे आरती करके और मिठाइयाँ देकर उनकी प्रशंसा करते हैं।

पाँच चीज़ें जो आपको अपने बूढ़े माता-पिता के लिए करनी चाहिए !

  1. उनकी बेहतर देखभाल के विकल्पों के बारे में बात करें
  2. अपने माता-पिता की स्वास्थ्य स्थितियों को समझें
  3. अपने माता-पिता की इच्छाओं के बारे में पूछताछ करें
  4. यदि संभव है तो उन्हें तीर्थ यात्रा पर ले जाया जा सकता है
  5. उनके साथ समय व्यतीत करें

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