उत्तर भारत के कौन से 5 प्रसिद्ध तीर्थ हैं जिनकी यात्रा फरवरी माह में की जा सकती है ?

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उत्तर भारत में फरवरी में मौसम काफी सुखद होता है। इस मौसम में उत्तर भारत के प्रसिद्ध तीर्थो के साथ पर्यटन का आनंद लिया जा सकता है क्योंकि अभी स्थानों पर ज्यादा भीड़ नहीं है तो आइए उत्तर भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों की यात्रा पर चलते हैं।

1.काशी विश्वनाथ मंदिर,काशी उत्तर प्रदेश

काशी विश्वनाथ मंदिर एक हिंदू मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है ये भारत के उत्तर प्रदेश के वाराणसी में विश्वनाथ गली में स्थित है ये एक हिंदू तीर्थस्थल है और बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक है। पीठासीन देवता को विश्वनाथ या विशेश्वर के नाम से जाना जाता है वर्तमान संरचना 1780 में इंदौर की मराठा शासिका अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निकटवर्ती स्थल पर बनवायी गयी थी।

काशी विश्वनाथ

ज्योतिर्लिंग एक प्राचीन अक्षमुण्डी प्रतीक है जो सृष्टि के मूल में सर्वोच्च निराकार वास्तविकता को दर्शाता है, वह जिसमें से शिव (निर्गुण) का सगुण रूप प्रकट हुआ था।

1 जनवरी 2023 को रिकॉर्ड 3.35 लाख तीर्थ यात्रियों ने मंदिर में दर्शन किए। जनवरी 2023 के महीने में प्रतिदिन मंदिर में औसतन 45,000 से अधिक लोग आते थे। काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अनुसार दिसंबर 2021 में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उदघाटन के बाद से 10 करोड़ पर्यटक मंदिर का दौरा कर चुके हैं।

आरती का समय

  • मंगला आरती प्रातः 3.00 बजे से प्रातः 4.00 बजे तक
  • भोग आरती 11.15 पूर्वाह्न से 12.20 अपराह्न तक
  • संध्या आरती 7.00 बजे से 8.15 बजे तक
  • श्रृंगार आरती रात 9.00 बजे से रात्रि 10.15 बजे तक
  • शयन आरती रात्रि 10.30 बजे से रात्रि 11.00 बजे तक

2.बांके बिहारी मंदिर वृन्दावन उत्तर प्रदेश

श्री बांके बिहारी मंदिर में स्थापित बिहारी जी की छवि स्वयं दिव्य युगल श्यामा श्याम द्वारा स्वामी हरिदास को प्रदान की गई थी। भक्तों की इच्छा को स्वीकार करते हुए भगवान अपनी दिव्य आभा के साथ स्वयं प्रकट हुए और अंतर्धान होने से पहले एक काली आकर्षक छवि छोड़ गए।

इस प्रकार भगवान बांके बिहारी का भौतिक रूप अस्तित्व में आया जो लोकप्रिय रूप से बिहारीजी के नाम से जाना जाता है। बिहारीजी की सेवा का उत्तरदायित्व स्वयं स्वामीजी ने गोस्वामी जग्गन्नाथ को सोपा था। गोस्वामी जग्गन्नाथ स्वामी हरिदास जी के प्रमुख शिष्य में से एक और छोटे भाई थे। परम्परा के अनुसार सेवा आजतक जगन्नाथ गोस्वामी के वंशजो द्वारा की जाती है।

Banke Bihari

प्रारंभ में भगवान को निधिवन में एक मंदिर में स्थापित किया गया था।1862 ईस्वी में बिहारी जी की प्रतिमा के अनुरूप एक नये मंदिर का निर्माण कराया गया गोस्वामीयो ने स्वयं निर्माण के लिए संसाधन जुटाए।ये मंदिर अपने आप में एक वास्तुशिल्प सौंदर्य है।

और समकालीन राजस्थानी शैली में बनाया गया है। बिहारीजी की सेवा अपने आप में अनोखी है इसे हर दिन तीन भागो में यानि श्रंगार, राजभोग और शयन में किया जाता है जबकी श्रंगार (जिसमे स्नान, श्रंगार, मुकुट और हार जैसे आभूषणों से अलंकरण शामिल है)और राजभोग पूर्वाहन्न में दिया जाता है।

शयन सेवा रात्रि को दी जाती है, मंदिर में मंगला सेवा (सुबह जल्दी) की परंपरा नहीं है, स्वामी हरिदास मंगला सेवा के पक्ष में नहीं थे क्योंकि वे चाहते थे कि भगवान बाल रूप में है और एक बच्चे की तरह उन्हें पूरा आराम मिले इसलिए वे उन्हें इतनी सुबह गहरी नींद से परेशान नहीं करना चाहते थे मंदिर आज अपनी पूरी महिमा के साथ खड़ा है जिसके अंदर स्वयं भगवान निवास करते हैं, यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं।

आरती का समय

  • श्रृंगार आरती प्रातः 7.45 बजे
  • राजभोग आरती सुबह 11.55 बजे
  • शयन आरती रात्रि 9.30 बजे

3.राम मंदिर अयोध्या उत्तर प्रदेश

रामलला विराजमान विष्णु के अवतार राम के शिशु रूप में मंदिर के प्रमुख देवता हैं मंदिर निर्माण अधिकारिक तौर पर 5 अगस्त को आधारशिला समारोह के बाद शुरू हुआ।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आधारशिला के रूप में 40 किलो चांदी की ईट रखी गई, 4 अगस्त को रामार्चा पूजा की गई, सभी प्रमुख देवी देवताओं को निमंत्रण दिया गया।

रामलला की पोशाक दर्जी भागवत प्रसाद और शंकर लाल ने सिली थी जो राम की मूर्ति के चौथी पीढ़ी के दर्जी थे।

राम मंदिर

राम लला 1989 में विवादित स्थल पर अदालत मामले में एक वादी थे उनको कानून द्वारा एक न्यायिक व्यक्ति माना गया था उनका प्रतिनिधित्व बीएचपी के वरिष्ठ नेता त्रिलोकी नाथ पांडे ने किया था जिन्हे रामलला का सबसे करीबी मानवी मित्र माना जाता था श्री राम मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को दोपहर 12:29 बजे 90 मिनट के शुभ मुहूर्त काल के दौरान की गई, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि रहे।

रामलला दर्शन का समय

  • प्रातः 7:00 बजे से प्रातः 11:30 बजे तक
  • शाम को 2:00 बजे से रात 10:00 बजे तक

आरती का समय

  • श्रंगार आरती प्रातः 6:30 बजे
  • संध्या आरती 7:30 बजे

4.माता वैष्णो देवी मंदिर कटरा, जम्मू

1585 मीटर (5200) फीट की ऊंचाई पर स्थित ये मंदिर कटरा से 12 किमी दूर त्रिकुटा पहाड़ी पर है ये जम्मू कश्मीर से 61 किमी दूर है।

पवित्र गुफा के भुवैज्ञानिक अध्ययन से पता चला है कि इसकी आयु 10 लाख वर्ष है, ऋग्वेद में त्रिकुटा पहाड़ी का भी उल्लेख आता है जहां मंदिर स्थित है। आम तौर पर यह भी माना जाता है कि पांडवों ने सबसे पहले देवी मां के प्रति श्रद्धा और क्रतग्यता  प्रकट करते हुए कोल कंडोली और भवन में मंदिर का निर्माण कराया था।

वैष्णो देवी

त्रिकुटा पर्वत के ठीक बगल में और पवित्र गुफा की ओर देखने पर पत्थर की पाँच संरचनाये है जिन्हे पंच पांडवों का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि प्रसिद्ध तांत्रिक भैरोनाथ ने वैष्णो देवी को देखा और उनके रूप पर मोहित हो गया वे उसे त्रिकुटा गुफ़ा में ले गई वैष्णो देवी बाद  में अपने मूल रूप  दुर्गा में बदल गई और गुफ़ा में अपनी तलवार से उसका सिर काट दिया।

हिंदू पौराणिक कथाओं में माना जाता है कि वैष्णो देवी का मूल निवास अर्धकुंवारी था जो कटरा शहर और गुफ़ा के बीच लगभाग 6 किमी दूर एक स्थान था श्राइन बोर्ड ने कटरा में रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के पास ‘वैष्णवी धाम’, ‘कालिका धाम’, ‘सरस्वती धाम’ ‘निहारिका यात्री निवास’ ‘शक्ति भवन’ और ‘आशीर्वाद भवन’ जैसे अतिथि गृहो का भी निर्माण किया है।

दिसंबर से जनवरी तक सर्दियो के मौसम के दौरान वैष्णो देवी मंदिर बर्फ से ढका रहता है, वैष्णो देवी में सभी शक्तियाँ समाहित है और वे महादेवी के रूप में संपूर्ण सृष्टि में विद्यामान है।

वैष्णो देवी दर्शन का समय

  • प्रातः 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
  • शाम को 4:00 अपराह्न से 9:00 अपराह्न तक

5.ऋषिकेश देहरादून उत्तराखंड

ऋषिकेश जिसे हृषिकेश भी कहा जाता है उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले में देहरादून के पास एक शहर है ये गंगा नदी के दाहिनी ओर स्थित है और हिंदुओं के लिए एक तीर्थ है यहां प्राचीन ऋषि मुनि उच्चज्ञान की खोज में ध्यान करते थे  गंगा के किनारे अनेक आश्रम और मंदिर बने हैंइसे गढ़वाल हिमालय का प्रवेश द्वार और विश्व की योग राजधानी के रूप में जाना जाता है।

टिहरी बाँध ऋषिकेश से 86 किमी (53 मील) दूर है। उत्तर काशी एक लोकप्रिय योगस्थल गंगोत्री के रास्ते में 170 किमी (110 मील) की चढ़ाई पर स्थित है।

ऋषिकेश

चार धाम तीर्थ स्थान गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ की यात्रा के लिए ऋषिकेश आरंभिक बिंदु है.ये हर्षिल, चोपता,औली जैसे हिमालयी पर्यटन स्थलो के साथ-साथ डोडीताल, दयारा बुग्याल, केदार कांथा और हरकी दून जैसे ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन ट्रैकिंग स्थलो के लिए भी प्रारंभिक बिंदु है।

परमार्थ निकेतन

हरे भरे हिमालय की गोद में गंगा के किनारे स्थित हैं आश्रम की स्थापना 1942 में पूज्य स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज (1901-1965) द्वारा की गई थी1986 से पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष और अध्यात्मिक प्रमुख हैं 1000 से अधिक कमरों वाला परमार्थ निकेतन ऋषिकेश का सबसे बड़ा आश्रम है।

गंगा आरती का समय

  • प्रतिदिन शाम 6:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक

FAQs:

Q: क्या काशी विश्वनाथ मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क लगता है?

A: काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए कोई शुल्क नहीं है, विशेष पूजा सेवा के लिए या कोई पर्यटक विशिष्ट अनुष्ठान करवाना चाहता है तो इसके लिए पुजारी को दक्षिणा देनी पड़ती है।

Q: काशी विश्वनाथ मंदिर में किस चीज़ की अनुमती नहीं है।

A: 1.तम्बाकू और धूम्रपान की अनुमति नहीं है।

2. मंदिर में जूते चप्पल पहन कर जाने की अनुमति नहीं है।

3.आप मंदिर में मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक आइटम लेकर नहीं जा सकते।

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