तुलसी पूजन दिवस : जाने तुलसी पूजन विधि तुलसी के प्रकार और औषधीय महत्व

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तुलसी पूजन दिवस

भारतीय संस्कृति के पुरातन ग्रंथ वेदो में भी तुलसी के गुणों और इनकी उपयोगिता को समझाया गया है, तुलसी का वानस्पतिक नाम ओसीमम सैक्टम है, भारत में लोग तुलसी को अपने घर के आंगन में ,बगीचे में लगाते हैं और दरवाजे पर रखते हैं, इनके पत्ते अंडाकार आकार के होते हैं,और तुलसी समूह विन्यास (Configuration) में पिंक वॉयलेट मंजरी के साथ आती हैं

ज्यादातर बरसात के मौसम में नए पौधे बिना प्रयास के स्वयं ही आ जाते हैं वैसे तो गुण और धर्म की दृष्टि से श्यामा तुलसी को ही बेहतर माना जाता है लेकिन विद्वान दोनों को समान ही मानते हैं भारत में तुलसी को जल अर्पित करके पूजा करने की परंपरा है जिससे ये फले-फूले इनको विष्णुप्रिया, हरिप्रिया, वृंदा, श्यामा आदि नामों से पुकारा जाता है 

आज भारत में तुलसी पूजन दिवस मनाया जा रहा है हर हिंदू घर में पवित्र तुलसी का दर्शन और पूजन शुभ माना जाता है आयुर्वेदिक दृष्टि से भी तुलसी बहुत महत्वपूर्ण है भारत में 3 प्रकार की तुलसी पाई जाती है तुलसी में देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है इसलिए तुलसी को हरिप्रिया भी कहा जाता है तुलसी की पूजा सुख, मानसिक शांति और समृद्धि के लिए रोजाना करनी चाहिए, तो आइए आज 25 दिसंबर को तुलसी पूजन के विशेष अवसर पर मां तुलसी से जुड़े सभी अज्ञात तथ्यों के बारे आप से शेयर कर रहे हैं

भारत में तुलसी के प्रकार

  1. बैंगनी हरे पत्ती वाली तुलसी को श्यामा तुलसी कहा जाता है
  2. चमकीली हरे पत्ती वाली तुलसी को रामा तुलसी कहा जाता है
  3. सामान्य बड़ी पत्ती वाली तुलसी को वन तुलसी कहा जाता है

बैंगनी हरे पत्ती वाली श्यामा तुलसी

आपने घरो में श्यामा तुलसी को देखा होगा, श्यामा तुलसी का रंग गहरा हरा होता है, इनकी पत्तियां गहरे हरे और बैंगनी रंग की होती हैं और इसलिए इन्हें श्यामा तुलसी कहा जाता है, इस तुलसी के श्याम रंग के कारण ही इन्हें भगवान की अति प्रिय कहा जाता है। और कृष्णा तुलसी के नाम से भी जाना जाता है

श्यामा तुलसी

चमकीली हरे पत्ती वाली रामा तुलसी

गुण धर्मो में रामा और श्यामा तुलसी समान होती हैं, इनकी पत्तियां चमकीली और हरे रंग की होती हैं दोनों प्रकार की तुलसी में पत्तियां सुगंधित और अंडाकार होती हैं तथा मंजरी में छोटे काले बीज होते हैं, दोनों एक दूसरे की पूरक होती हैं, दोनों के समान औषधीय गुण होते हैं और आध्यात्मिक सम्मान भी समान है

रामा तुलसी

सामान्य बड़े पत्तों वाली वन तुलसी

श्यामा और रामा तुलसी की अपेक्षा वन तुलसी हिमालय क्षेत्र में होती है सामान्य तोर पर ये घरो में उपलब्ध नहीं होती है, इनके पत्ते दो रंग के होते हैं, ऊपर के पत्ते चमकीले हल्के हरे रंग के होते हैं और नीचे के पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं, सभी प्रकार तुलसी में इन्हें सबसे बेहतर और स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है, इन्हें जंगली तुलसी और बर्बरी तुलसी के नाम से भी जाना जाता है।

वन तुलसी

तुलसी पूजन के मंत्र

वृंदा वृंदावनि विश्वपूजिता विश्वपावनी | पुष्पसार नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी||

एतभामांष्टक चैब स्तोत्रं नामार्थं संयुतम| यः पठेत तम च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलं लभेत्||

अर्थ: हे वृंदा देवी ! आप वृंदावनी, विश्वपूजिता, विश्व पावनी, पुष्पसारा,नंदनीय तुलसी और कृष्णजीवनी हो, श्री तुलसी के पूजन के समय जो इन 8 नामों का पाठ करता है वह अश्वमेध यज्ञ के फल को प्राप्त करता है

तुलसी पूजन कैसे करें

प्रतिदिन सुबह और शाम तुलसी पूजन का विधान है, पूजन सामग्री में धूप, दीप, अगरबत्ती, सिन्दूर, माला, जल अर्पण करना शुभ माना जाता है

तुलसी दीपक जलाते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम धन सम्पदाम्  |

शत्रु बुद्धि विनाशाय दीपम् ज्योति नमोस्तुते ||

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रविवार को तुलसी दीपक जलाने और पूजन करने,तुलसी को स्पर्श करने का निषेध किया गया है

 

तुलसी के कुछ दिव्य मंत्र हैं जिनके नियम जप से जीवन पर चमत्कारी प्रभाव देखने में आता है, तुलसी गायत्री मंत्र एक ऐसा ही मंत्र है, इसके नियम जप से देवी लक्ष्मी की कृपा होती है गायत्री मंत्र जाप यदि एकादशी, शनिबार और शुक्रवार को किया जाए तो विशेष अच्छा रहता है, मंत्र जाप 9 से अधिक 11 108 या 1008 बार करना चाहिए।

तुलसी माला

हिंदू धर्म में तुलसी माला का अलग ही आध्यात्मिक महत्व है, इसे वैष्णव लोग (जोकी भगवान कृष्ण की आराधना करने वाले) धारण करते हैं इसमें 108 मनके होते हैं, इसे पहनने से हृदय को शांति मिलती है

तुलसी का पौधा किस दिशा में रखना चाहिए?

तुलसी को घर की उत्तर दिशा में रखकर पूजन करने का विधान है, और आरती के समय पूर्व दिशा में मुख होना चाहिए ऐसा माना जाता है कि उत्तर दिशा कुबेर की होती है, और इस दिशा में पूजन करने से घर में धन, शांति, सुख और समृद्धि की वृद्धि होती है

तुलसी का औषधीय महत्व

भारतीय संस्कृति में तुलसी को पूज्यनीय माना जाता है, हिंदू धर्म में बिना तुलसी के धार्मिक अनुष्ठान शुरू नहीं होते हैं धार्मिक महत्व के साथ तुलसी औषधीय गुणो से भी भरपूर है, तुलसी एक ऐसी औषधि है जो सर्दी, जुकाम, खांसी, दांत रोग और श्वास रोग में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसीलिये तुलसी को ‘जड़ी बूटीयों की रानी’ कहा जाता है

तुलसी में खनिज और विटामिन भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं, जिनमें विटामिन सी, जिंक, आयरन, क्लोरोफिल और कैल्शियम मुख्य हैं आइये जानते हैं तुलसी किस रोग में तुलसी के क्या औषधीय फायदे हैं

तनाव दूर करने में तुलसी की भूमिका 

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) के शोध के अनुसार तुलसी में एंटीस्ट्रेस तत्व होते हैं जो तनाव से राहत देने का काम करते हैं

सर्दी जुकाम में तुलसी की भूमिका

तुलसी को प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है जिससे सर्दी ,जुखाम ,बुखार जैसे रोगो से लडने में ताकत मिलती है

घाव भरने में तुलसी की भूमिका

तुलसी में पाए जाने वाले एंटी बैक्टीरियल तत्व चोट के घाव को पकने से रोकते हैं और तुलसी के पत्तों को फिटकारी के साथ पीसकर लगाने पर चोट को जल्दी ठीक करने में मदद करते हैं

आयुर्वेदिक और हर्बल सिरप बनाने में तुलसी का प्रयोग

तुलसी की पत्तियां बात और कफ को समाप्त कर देती हैं, इसलिए कई आयुर्वेदिक और हर्बल कफ सिरप बनाने में तुलसी को एक मुख्य घटक के रूप में उपयोग किया जाता है

मृत्यु के समय तुलसी की भूमिका

हिंदू धर्म में जीवन के अंतिम समय में मुंह तुलसी दल डाला जाता है ऐसा माना जाता है कि इससे सद्गति प्राप्त होती है मृत्यु के समय गले में कफ जमा हो जाने पर सांस लेने और बोलने में समस्या होती है, तुलसी के पत्तो में कफ को समाप्त करने का विशेष गुण होता है ऐसे में तुलसी का रस गला साफ करने में मदद करता है

तुलसी पूजन से सकारात्मक ऊर्जा

घर में तुलसी का पौधा लगाने से सकारात्मक ऊर्जा आती है, वहीं जब हम रोजाना तुलसी पूजा करते हैं तो शरीर में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे बुद्धि तेज और कार्य करने में सफलता मिलती है

तुलसी विवाह का आयोजन

हर साल दीपावली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में देवोत्थान एकादशी आती है इस दिन देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह बड़े धूमधाम से किया जाता है, भगवान कृष्ण ने देवी तुलसी से शालिग्राम रूप में ही विवाह किया था, दैनिक तुलसी पूजन से देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा सहजता से प्राप्त हो सकती है।

FAQs:

Q: क्या तुलसी का पौधा दूसरो को उपहार में सकते है?

A: वास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी का पौधा सबसे पवित्र और शुभ पौधा है, जो सकारात्मकता बढ़ाता है इसलिए पौधे को उपहार देना उपयुक्त और सार्थक संकेत है।

Q:  तुलसी पूजन के नियम क्या है?

A: प्रतिदिन तुलसी पूजन करना चाहिए लेकिन एकादशी और रविवार के दिन तुलसी पूजन और जल नहीं देना चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है कि माता तुलसी उस दिन प्रभु श्री हरि विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती है।

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4 COMMENTS

  1. Tulsi poja is very important to do in life. Very less people know about it. Thanks for sharing fruitful information 👍

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